श्री रतन शारदा श्री राहुल दीवान के साथ निम्नलिखित विषयों पर चर्चा कर रहे हैं:
- संघ की वर्तमान ताकत – शाखा और संबद्ध संगठनों की संख्या।
- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और इसकी शाखा पद्धति की प्रमुख विशेषताएं।
- प्रचारक की अवधारणा।
- दर्शन और हिंदू समाज को संगठित करने की आवश्यकता।
- कट्टरवाद के मूल सिद्धांत।
- संघ के जीवन के अभूतपूर्व क्षण।
- एकल विद्यालय।
- आरएसएस की आलोचना।
वक्ता:
श्री रतन शारदा बचपन से ही संघ के सदस्य हैं। स्थानीय टीम का नेतृत्व से लेकर 5 साल के लिए मुंबई स्तर संघचालक के रूप में उन्होंने विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। उन्होंने विश्व अध्ययन केंद्र मुंबई की स्थापना की। वे सेंट जेवियर्स कॉलेज के पूर्व छात्र रहे हैं व अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान में एमए हैं। उन्होंने “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ – प्रस्तावों के माध्यम से संघ की समझ – उत्तर-पूर्व, जम्मू कश्मीर और पंजाब” विषय पर पीएचडी किया है।
उन्होंने चार पुस्तकें लिखी हैं: – आरएसएस – 360 डिग्री, संघ और स्वराज (अंग्रेजी और हिंदी) स्वतंत्रता संग्राम में संघ की भूमिका, ग्लोबल हिंदू-एक संस्मरण (एच.एस.एस के संस्थापक सदस्य), प्रो राजेंद्र सिंह – चतुर्थ सरसंघचालक की जीवनी (हिंदी)। श्री गुरुजी (द्वितीय आरएसएस सरसंघचालक) के बारे में प्रख्यात विचारक श्री रंगा हरि जी द्वारा लिखी गई दो पुस्तकों का हिंदी से अंग्रेजी में अनुवाद। इसके अलावा उन्होंने फिल्म्, उपन्यास, पाकविद्या से लेकर प्रबंधन तक कुल 12 पुस्तकें संपादित की हैं। वर्तमान में, आप संघ के राष्ट्रीय मीडिया टीम के सदस्य हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस) भारत का एक हिन्दू राष्ट्रवादी अर्धसैनिक, स्वयंसेवक संगठन है, जो व्यापक रुप से भारत के सत्तरुढ़ दल “भारतीय जनता पार्टी” का पैतृक संगठन माना जाता है। यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की उपेक्षा संघ या आर.एस.एस के नाम से अधिक प्रसिद्ध है।
संगम वार्ता में आ.एस.एस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के बारे में श्रीमान रतन शारदा और श्रीमान राहुल दीवान के साथ निम्नलिखित विषय पर चर्चा कर रहे हैं –
एकल विद्यालय – वर्तमान समय में आर.एस.एस दुनिया का सबसे प्रसिद्ध एवं बड़ा विद्यालय एकल विद्यालय है, जिसकी संख्या 80 हजार है। एकल विद्यालय में विभिन्न प्रकार के सदस्य जुड़े हुए हैं, जो आर.एस.एस को पूर्ण रुप से सहयोग करते हैं और इसके कार्य व विचारों को सहयोग एवं विस्तार करने के लिए एकल विद्यालय से जुड़कर सम्पूर्ण रुप से अपना योगदान देते हैं, जैस- बी.एच.पी, संघ, एकल फाउंड़ेशन इत्यादि।
कट्टरवाद के मूल सिद्घांत – भारत एक ऐसा देश है जो पूरे विश्व में जनसंख्या के दूसरे स्तर पर आता है। भारत की कुल जनसंख्या 135 करोड़ है, जिसमें सभी धर्म के लोग रहते हैं, जिसमें से 16 करोड़ मुस्लिम धर्म के लोग रहते हैं जो हमेशा चर्चित में रहता है। लेकिन 16 करोड़ मुस्लिम में से अधिक मात्रा में कट्टरवादी है, लेकिन इनमें से कुछ मुस्लिम जो पढ़े-लिखे, आधुनिक, उच्च स्तर विचार वाले एंव समझदार नागरिक भारत को ही अपना देश मानते है तथा देश के विकास के लिए व समाज को आधुनिकता की ओर आगे बढ़ाने में अपना पूर्ण योगदान देते है। वह लोग अपने ही धर्म में बदलाब व लोगों की सोच में बदलाव लाने के लिए अपना कदम आगे बढ़ाते हैं। उदाहरणः- “तीन तलाक़ के लिए मुस्लिम महिला और कुछ पुरुष आगे बढ़े और इस तीन तलाक के बंद करवाया गया।“ क्योंकि मुस्लिम महिलाओं को मालूम है कि उनके धर्म में उनके साथ अन्याय हो रहा उनको अपना हक मालूम और उसको बंद करवाने लिए सरकार से मांग की गई थी और वो सफल भी हुआ। किसी को नहीं मालूम था की तीन तलाक़ को इतना अधिक समर्थन मिलेगा लेकिन मिला। भारत में 16 करोड़ में से कुछ प्रतिशत मुस्लिम ने घर वापसी किया है जो भारत को ही अपना घर मानते हैं। इसमें वो मुस्लिम है जो अपने हक को जानते जिनको सही और गलत का अंतर मालूम है तथा सही रास्ते और अपने हक के लिए आगे बढ़ते है, इनको देखकर कुछ और लोग आगे बढ़ते है। जैसे बून्द-बून्द से घड़ा भरता है वैसे ही मुस्लिम धर्म के लोगों में भी धीरे-धीरे सुधार आयेगा, लेकिन समय लगेगा।
श्रीमान रतन शारदा जी एक उदाहरण देते हुए समझाते हैः- “जापान के लोग कबड्ड़ी खेल की बहुत प्रसंशा करते है, लेकिन खेलते नहीं है क्योंकि कबड्ड़ी खेल गुलामों का खेल है, जो अपने देश को नहीं बचा सका वो खेल हम क्यों खेलेंगे।“
जब हम मजबूत होंगे तो हमें खुद अच्छा लगेगा, उसी तरह (मुस्लिम) जब आप सही हो तो आपका सहयोग धीरे-धीरे सभी लोग करेंगे भले ही उस सच को स्वीकारने में समय लगेगा।
दर्शन और हिन्दू समाज को संगठित करने की आवश्यकता – श्रीमान रतन शारदा जी का कहना है कि परिवार योजना आर.एस.एस के हित में नहीं है लेकिन शारदा जी मानते है कि परिवार योजना भारत में जरुरी हैष। शारदा जी किसी अन्य राज्य का उदाहरण देते हुए बताते है कि – “दो से अधिक बच्चें वाले को व 10वी पास वाले को चुनाव में खड़ा होने की अनुमति नहीं है। लेकिन इस कानून को कोर्ट के द्वारा रद्द कर दिया गया।“ जो कानून देश व देशवासियों के लिए सही व मजबूत होगा उसी कानून को चलाने के लिए सरकार आदेश देगी जैसे- तीन तलाक़ और जनता के लिए चुनाव।