आज हम ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां हम ये जानते हैं कि बहुत कुछ हम खो चुके हैं परन्तु बहुत कुछ बचाने का एवं पुन: स्थापित करने का भी कदाचित् यही अन्तिम समय है। ऐसे में हमें किस मार्ग का अनुसरण करना चाहिए कि जिससे हमकम से कम मूल्य दे कर अधिक से अधिक, नष्ट हो रही परंपराओं को एवं जीवन आदर्शों को बचा सकें, साथ ही नष्ट हो चुकी परंपराओं को, एक बार पुन: लोगों के मध्य खड़ा कर सकें।