भारतीय इतिहास के पुनर्लेखन की आवश्यकता — श्रीनिवास हिंगे का संगम व्याख्यान

हमे आज तक एक तरफा अपितु गलत दृष्टिकोण से इतिहास सिखाया गया| ऐसा इतिहास जो हमे अपने राष्ट्र के बारे मे गर्व महसूस नहीं करवता| ये इतिहास न हमे अपने वीरो से न अपने संस्कृति से पहचान करवाता हे. भारत को सशक्त राष्ट्र बनाने के लिए हमे अपने देश के प्रति आदर और अभिमान महसूस करना होगा और ये अभिमान हमे अपना गौरवशाली इतिहास ही महसूस करवा सकता हे| वर्तमान के और आने वाले पीढ़ियों को रामायण महाभारत से लेके आज तक का इतिहास मालूम होना चाइये| हमारे देश का दुर्भाग्य ये हे की हमारा इतिहास विदेशी आक्रमको ने लिखा हे| अब समय आ गया हे की हम अपना गौरव पूर्ण इतिहास खुद लिखे, और देश को और विश्व को, वास्तविक भारत का परिचय करवा दे| ऐसा इतिहास का लेखन करे जो हमारे देश का ही मार्गदर्शन करे और उसे उन्नति की ओर ले जाये|

Till today we have been taught history with a wrong approach. A history that does not make us feel proud about our nation. This history does not identify us with our heroes or our culture. To make India a strong nation, we must feel respectful and proud about it, and we can get this pride only by knowing its glorious past. The present and future generations should know the history from the Ramayana and Mahabharata to the present day. The misfortune of our country is that our foreign invaders have written our history. Now the time has come that we should write our glorious history ourselves and introduce the country and the world to the real India. Write a history that guides our country and leads it to progress.


वक्ता-परिचय: –

रीनिवास हिंगे मूलरूप से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं किन्तु इसके साथ ही इतिहास के अध्यन में इनकी विशेष रूचि है। वे “INDIANS MUST KNOW – Let’s Be Proud” पुस्तक के लेखक हैं और अपने आप को देश का कार्यकर्ता समझते है | आगे…


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