अश्विनी उपाध्याय पेशे से वकील हैं और महत्त्वपूर्ण जनहित याचिकाओं कि अगुवाई के लिए जाने जाते हैं| अब तक उन्होंने उच्च न्यायालयों से लेकर सर्वोच्च न्यायलय तक 50 से ज्यादा महत्त्वपूर्ण याचिकाएं दायर की हैं जो विशेषकर समाज के हाशिये पर स्थित लोगों के सामाजिक आर्थिक और राजनैतिक हक़ और न्याय के लिए महत्त्वपूर्ण सिद्ध हुए हैं | वे चुनावी सुधार, शैक्षनिक सुधार, पुलिस सुधार, न्यायिक सुधार आदि के अलावा लैंगिक न्याय, लैंगिक समानता व स्त्रियों कि गरिमा के क्षेत्र में भी कार्यरत हैं| उनकी अधिकतर याचिकाएं महत्त्वपूर्ण होने के कारण प्रायः न्यायलय द्वारा सुनवाई के लिए स्वीकार कि गयी हैं व उन्हें इस सम्बन्ध में अनुशास्नात्मक कार्यवाही का सामना नहीं करना पड़ा|

उनकी अति महत्त्वपूर्ण याचिकाओं में धारा 35A, व धारा 370 की संवैधानिक वैधता कि जांच; जम्मू-कश्मीर के संविधान व ध्वज कि अवैधता; ट्रिपल तलाक, बहुविवाह, निकाह-हलाला, निकाह-मुता, शरिया न्यायालय आदि कि अवैधता; यूनिफार्म सिविल कोड लागू करने, 8 राज्यों में हिन्दुओं को अल्पसंख्यक करार देने आदि कई याचिकाएं रही हैं|


अश्विनी उपाध्याय का सृजन व्याख्यान