इस्लामिक कट्टरवाद, ईसाई मिशनरी, शहरी नक्सलवाद और मीडिया-एन.जी.ओ-मानवाधिकार गठजोड़ के एक साझा कार्य योजना अउर समन्वित प्रयास बा जवन सबसे गंभीर खतरा के नुस्खा बनेला। इ सब एक दूसरा के न्यूनतम उद्देश्य: भारत के सब जगह से घाहील करे, खंडित करे के उद्देश्य में मदद करेला। पी.एफ.आई, रोहिंग्या, पत्थलगड़ी (झारखंड), या प्रस्तावित खालिस्तान जनमत संग्रह आदि की गतिविधिअन के बारे में अगर ध्यान देल जाओ त साफ पता चली की कइसे भारत के बिरुद्ध साजिश के अंजाम देल जा रहल बा।
Please Share This Share this content
More From The Speaker
[Q/A] आदि शंकराचार्य : जीवन चरित्र एवं समयकाल समीक्षा — श्री अमित शर्मा का व्याख्यान
Pasmanda Muslims: Disappearing identity| Amana Ansari | #SangamTalks
Vasudeva Krishna and Mathura | Prof. Dr. Meenakshi Jain | Dr. Rinkoo Wadhera | #SangamTalks
Kashmir LitFest | Zooming Out on Kashmir: Beyond Narratives and Boundaries | Panel Discussion | General Devendra Pratap Pandey | Shehla Rashid | Raja Muneeb
Arthashastra And Its Contemporary Relevance In India – A Talk By Sriram Subramanian