Book Discussion | Gopal Kavi Aur Unki Vrindavan Dhamanuragavali | Multi Speaker

वृन्दावन धामानुरागावली, बृज अध्येता समूह के कई दशकों की प्रतीक्षा एवं कई शोध कर्ताओं के प्रयासों के फलस्वरूप एक प्रकाशित पुस्तक का रूप ले पायी है | कवि गोपाल राय के कथनानुसार यह भक्त माल की परंपरा में विस्तार पूर्वक ग्रन्थ है जिसमें इतिहास, पुराण, श्रुतियाँ व अनुभव का समन्वय है, गोपाल कवि उस वृन्दावन के आराधक हैं जो साधकों के साक्षात्कार से बसा है| संपादक डॉ जयेश खंडेलवाल ने विस्तृत और लघु दोनों प्रतियों का समावेश इस पुस्तक में किया है। इतिहास की दृष्टि से भी यह ग्रन्थ अत्यंत महत्वपूर्ण है।

After much research and hard work over decades, the book by Shri Gopal Kavi – Vrindavan Dhamanuragavali has been edited and published by Dr Jayesh Khandelwal. This book is an important documentation of the Social and Cultural history, geography and genealogy of Vrindavan.

वक्ता:
श्री लक्ष्मी नारायण तिवारी, डॉ कृष्णचन्द्र गोस्वामी, डॉ विष्णु मोहन, श्री भावकृष्ण नांगिया, श्री जयकृष्ण गोस्वामी, डॉ रिंकू वढेरा, डॉ स्वाति गोयल तथा डॉ जयेश खण्डेलवाल

About the Speakers:
Shri Lakshmi Narayan Tiwari, Dr Krishnachandra Goswami, Dr Vishnu Mohan, Shri Bhavkrishna Nangia, Dr Rinkoo Wadhera, Dr Swati Goyal and Dr Jayesh Khandelwal.